Sunday, September 13, 2009

Kisko Qatil Main Kahoon Kisko Maseeha Samjhoon. / किसको क़ातिल मैं कहूँ किसको मसीहा समझूँ,

किसको क़ातिल मैं कहूँ किसको मसीहा समझूँ,
सब यहाँ दोस्त ही बैठे हैं किसे क्या समझूँ ।

वो भी क्या दिन थे कि हर वहम यक़ीं होता था,
अब हक़ीक़त नज़र आए तो उसे क्या समझूँ ।

दिल जो टूटा तो कल हाथ दुआ को उठे,
ऐसे माहौल में अब किसको पराया समझूँ ।

ज़ुल्म ये है के है यक़ता तेरी बेगानारवी,
लुत्फ़ ये है के मैं अब तक तुझे अपना समझूँ ।
  • Ahmed Nadeem Qasmi.
  • Jagjit Singh.

Lab-E-Khamosh Se Izhaar-E-Tamanna Chahe. / लब-ए-ख़ामोश से इज़हार-ए-तमन्ना चाहे,

लब-ए-ख़ामोश से इज़हार-ए-तमन्ना चाहे,
बात करने को भी तस्वीर का लहज़ा चाहे ।

तू चले साथ तो आहट भी ना आये अपनी,
दरमियाहन भी ना हो यूँ तुझे तन्हा चाहे ।

ख़्वाब में रोये तो एहसास हो सैराबी का,
रेत पे सोये मगर आँख में दरिया चाहे ।

ऐसे तैराक़ भी देखे हैं ‘मुज़फ़्फ़र’ हमने,
गर्क़ होने के लिये भी जो सहारा चाहे ।
  • Muzaffar Warsi.
  • Chitra Singh.

Hum Mein Hi Thi Na Koi Baat Yaad Na Tumko Aa Sake. / हम में थी ना कोई बात, याद ना तुमको आ सके,

हम में थी ना कोई बात, याद ना तुमको आ सके,
तुमने हमें भूला दिया, हम ना तुम्हें भूला सके ।

तुम ही ना सुन सको अगर, किस्सा-ए-ग़म सुनेगा कौन,
किसकी ज़ुबाँ खुलेगी फिर, हम ना अगर सुना सके ।

रौनक़े-बज़्म बन गये, लब पे हिक़ायतें रही,
दिल में शिकायतें रही, लब ना मगर हिला सके ।

शौक़-ए-बिसाल है यहाँ, लब पे सवाल है यहाँ,
किसकी मजाल है यहाँ, हमसे नज़र मिला सके ।
  • Hafeez Jullundhari.
  • Chitra - Jagjit Singh.

Sunday, September 6, 2009

Mili Hawaon Mein Udne Ki Wo Sazaa Yaroon. / मिली हवाओं में उड़ने की वो सज़ा यारों,

मिली हवाओं में उड़ने की वो सज़ा यारों,
के मैं ज़मीन के रिश्तों से कट गया यारों ।

वो बे-ख़याल मुसाफ़िर मैं रास्ता यारों,
कहाँ था बस में मेरे उसको रोकना यारों ।

मेरे कलम पे ज़माने की गर्द ऐसी थी,
के अपने बारे में कुछ भी ना लिख सका यारों ।

तमाम शहर ही जिसकी तलाश में गुम था,
मैं उसके घर का पता किससे पूछता यारों ।
  • Waseem Barelvii.
  • Jagjit Singh - Lata Mangeshkar.

Din Guzar Gaya Aeitbar Mein Raat Kat Gayii Intezaar Mein. / दिन गुज़र गया ऐतबार में, रात कट गई इन्तज़ार में ।

दिन गुज़र गया ऐतबार में,
रात कट गई इन्तज़ार में ।

वो मज़ा कहाँ वस्ल-ए-यार में,
लुत्फ़ जो मिला इन्तज़ार में ।

उनकी इक नज़र काम कर गई,
होश अब कहाँ होशियार में ।

मेरे कब्ज़े में क़ायनात है,
मैं हूँ आपके इख़्तियार में ।

आँख तो उठी फूल की तरफ़,
दिल उलझ गया हुस्न-ए-ख़ार में ।

तुझसे क्या कहें कितने ग़म सहे,
हमने बेवफ़ा तेरे प्यार में ।

फ़िक्र-ए-आशियाँ हर खिज़ाम की,
आशियाँ जला हर बहार में ।

किस तरह ये ग़म भूल जायें हम,
वो जुदा हुआ इस बहार में ।
  • Fana Nizami Kanpuri.
  • Chitra - Jagjit Singh.

Dhuan Utha Tha Deewane Ke Jalte Ghar Se Saari Raat. / धुँआ उठा था दीवाने के जलते घर से सारी रात,

धुँआ उठा था दीवाने के जलते घर से सारी रात,
लेकिन वो ख़ामोश रहे दुनिया के ड़र से सारी रात ।

रात यूँ जलते दिल पर तेरी यादों कि बरसात हुई,
जैसे इक प्यासे कि चिता पर बरख़ा बरसे सारी रात ।

सारी रात तो सपने देखे सुबह को ये महसूस हुआ,
हमने अपना सर टकराया इक पत्थर से सारी रात ।
  • Shamim Shahabadi.
  • Chitra Singh.

Yeh Kiska Tassavoor Hai Ye Kiska Fasaana Hai. / ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है,

ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है,
जो अश्क़ हैं आँखों में तसबीह का दाना है ।

जो उन पे गुज़रती है किसने उसे जाना है,
अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है ।

आँखों में नमी सी है चुप चुप से वो बैठे हैं,
नाज़ुक सी निगाहों में नाज़ुक सा फ़साना है ।

ये इश्क़ नहीं आसान इतना तो समझ लिजिये,
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है ।

या वो थे ख़फ़ा हमसे या हम हैं ख़फ़ा उनसे,
कल उनका ज़माना है आज अपना ज़माना है ।
  • Jigar Moradabadi.
  • Jagjit Singh.

Rukh Se Parda Utha Hai Zara Saqiya Bus Abhi Rang-E-Mehfil. / रूख़ से परदा उठा है ज़रा साकीया, बस अभी रंग-ए-महफ़िल

रूख़ से परदा उठा है ज़रा साकीया, बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जायेगा,
है जो बेहोश वो होश में आयेगा, गिरनेवाला है जो वो सम्भल जायेगा ।

तुम तसल्ली ना दो सिर्फ़ बैठे रहो, वक़्त कुछ मेरे मरने का टल जायेगा,
क्या ये कम है मसीहा के रहने ही से, मौत का भी इरादा बदल जायेगा ।

तीर की जान हैं दिल, दिल की जान तीर है, तीर को ना यूँ खींचो कहा मान लो,
तीर खींचा तो दिल भी निकल आयेगा, दिल जो निकला तो दम ही निकल जायेगा।
 
इसके हँसने में रोने का अंदाज़ है, ख़ाक़ उड़ाने में फ़रियाद का राज़ है,
इसको छेड़ो ना ‘अनवर’ ख़ुदा के लिये, वर्ना बीमार का दम निकल जायेगा ।
  • Anwar Mirza Puri.
  • Jagjit Singh.

Raat Khamosh Hai, Chand Madhosh Hai, Tham Lena Mujhe. / रात ख़ामोश है, चाँद मदहोश है, थाम लेना मुझे,

रात ख़ामोश है, चाँद मदहोश है,
थाम लेना मुझे, जा रहा होश है ।

मिलन की दास्ताँ, धड़कनों की ज़ुबाँ,
गा रही है ज़मीं, सुन रहा आस्माँ,
गुनगुनाती हवा, दे रही है सदा,
सर्द इस रात की, गर्म आग़ोश है ।

महकती ये फिज़ा, जैसे तेरी अदा,
छा रहा है रूह पर, जाने कैसा नशा,
झुमता है जहाँ, अजब है ये समां,
दिल के गुल्ज़ार में, इश्क़ पुरजोश है ।
  • Hari Ram Acharya.
  • Jagjit Singh.

Gum Sum Ye Jahan Hai Hum Dum Tu Kahan Hai. / गुमसुम ये जहाँ है, हमदम तू कहाँ है,

गुमसुम ये जहाँ है, हमदम तू कहाँ है,
ग़मज़दा हो गई ज़िन्दगी आ भी जा ।

रात बैठी है बाहें पसारे,
सिसकीयाँ ले रहे हैं सितारे,
कोई टूटा हुआ दिल पुकारे,
हमदम तू कहाँ है,
ग़मज़दा हो गई ज़िन्दगी आ भी जा ।

आज आने का वादा भुला कर,
ना उम्मीदी की आन्धी चलाकर,
आशियाना वफ़ा का जलाकर,
हमदम तु कहाँ है,
ग़मज़दा हो गई ज़िन्दगी आ भी जा ।
  • B.K.Puri.
  • Jagjit SIngh.